जिन्दगी की सार्थकता की तलाश, भावनाओं में जीता हुआ कविता, गजल और साहित्य का प्रेमी तथा दर्शन का छात्र । जिन्दगी हरपल नया रंग दिखाती है और हम उसके प्रवाह मे टूटते,बिखरते, बनते बहते जातें है। बहुत कुछ मिलता है बहुत कुछ खो जाता है लेकिन हर पल यही ख्वाहिस होती है की कुछ और नया हो। इन्ही से जिन्दगी की मिठास बनी रहती। फ़िर भी …….
तदबीर से बिगडी हुई , तकदीर बना ले ।
अपने पे भरोसा है ,तो इक दाव लगा ले।
हर हार इक सबक है दौर -ए -जवानी ।
इन लफ्जों कि तरज हर दिल में बैठा दे।
मैं नहीं चाहता तू हार के बैठे ,
दिल के दर्द को हकिकी ताज पहना दे ।
कहने भर से नहीं होता कुछ हासिल।
शमा इश्क कि हर दिल में जला दे ।
तू तो अकेला है इस राह -ए -मंजिल में ।
अपने कर्म से इक महफ़िल सजा दे ।
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Desh Raj Sirswal, Research Scholar (ICPR-JRF) ,Department of Philosophy, Kurukshetra University,Kurukshetra-136119 (Haryana). and General Secretary,Milestone Education Society (Regd.002/06) Balmiki Basti, Pehowa (Kurukshetra)-136128 (Haryana) Email: drs.kuk@gmail.com My Main Page: Desh Raj Sirswal’s Page